Hi-Tech ALKALINE WATER IONIZERS 7 -PLATES Alkaline Water Filtration System | Produces pH 3-11.5 Alkaline Water | Up to -500 to -800 ORP | 3200 Liters Per Filter | Titanium Plates Platinum coated.
This blog is about entertainment and health information. I will share you unique information which would be helpful to improve your lifestyle and knowledge.
Showing posts with label हेल्थ. Show all posts
Showing posts with label हेल्थ. Show all posts
Friday, March 13, 2020
ALKALINE WATER IONIZERS.
Hi-Tech ALKALINE WATER IONIZERS 7 -PLATES Alkaline Water Filtration System | Produces pH 3-11.5 Alkaline Water | Up to -500 to -800 ORP | 3200 Liters Per Filter | Titanium Plates Platinum coated.
Friday, April 6, 2018
World Best Smart RO Water Purifier
Livpure Smart Touch 8. 5 L RO + UV +UF Water Purifier(Blue)
- Features:
- Storage Tank Capacity- 8.5 Litres
- 8 Stage Purification Cartridges- 1. Pre Filter 2. Anti-Scalant Cartridge 3. Sediment Filter 4. Pre Activated Carbon Filter Cum Adsorber 5. RO Membrane 6. Mineral Cartridge 7. UF Cartridge Filter 8. UV Disinfection Column.
- Membrane Life Enhancer available.
- Bluetooth connectivity.
- It's mineraliser attached water purifier.
2. Reason why you use this water purifier?
- This is one of the best Water Purifier in the world. It is best design and unique color, you can easily mount on wall.
- You can operate by your android phone and touch system.
- If any issue create in Water Purifier you will get notification immediate.
- Machine water tank made by food grade plastic which will free from cancer.
- This machine connect you via livpure app.
- It is one of the best selling product and Livpure is one of the best service provider company in water purifier division.
- Use this smart RO, be smart and feel proud yourself.
For Buy this product with great discount click image.
One more recomended device
Voltac ™ Universal Sports Running Waist Pocket Belt Case For All Mobiles Model 352036
One more recomended device
Voltac ™ Universal Sports Running Waist Pocket Belt Case For All Mobiles Model 352036
Friday, December 29, 2017
नौकासन के लाभ और विधि
नौकासन करने की विधि
समतल भूमि पर दरी बिछाकर उस पर पीठ के बल लेट जाइए दोनों
हाथ सिर की ओर लंबाई में फैला कर दोनों कानों से सटा लीजिए अब
दोनों हाथों के अंगूठे आपस में एक दूसरे से मिला लीजिए पैर भी आपस में सटे रहे अब धीरे-धीरे
सांस बाहर निकालते हुए दोनों कानों से सटे रखते हुए ही हाथों सिर और कमर के ऊपर
वाले पीछे के भाग को और पैरों, जांघो और नितंब को पृथ्वी से इतना ऊपर उठाइए कि
दोनों उठे हुए भाग पृथ्वी से लगभग 45 अंश का कोण बनाएं हाथों और पैरों की उंगलियों
एक बराबर ऊंचाई तक उठी हूं अब शरीर एक नाव की समान आकृति में आ जाता है इस स्थिति
में जब तक सांस को बाहर ही जब तक रोक सकते हैं रोके रहें फिर सांस लेते हुए
धीरे-धीरे शरीर को वापस नीचे लाकर आराम कीजिए इस क्रिया को 10 से 12 बार अवश्य
कीजिए सांस बाहर छोड़ने और सांस रोकने के समय को धीरे धीरे अपनी सुविधा के हिसाब से
बढाएं।
नौकासन के लाभ
- यह ह्रदय रोगों के लिए उत्तम आसन है
- रीढ के मनकों को व्यवस्थापन के साथ ही लचीला और स्वस्थ बनाता है
- पैरासिंपेथेटिक नाड़ियों पर इस आसन का अनुकूल खिंचाव पड़ने से पूरा स्नायु तंत्र सक्षम शक्तिशाली और स्वस्थ बनता है
- मानसिक स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य प्रणाली प्रभावित होकर मानवीय स्वभाव को सरल मिठी बोली वाला तथा बुद्धिमत्तापूर्ण बनाती है
- फेफड़ों के कोष्ठों पर भी इस आसन का उत्तम प्रभाव होता है जिससे प्राण शक्ति विकसित होकर श्वास, दमा और पुरानी खांसी को ठीक करता है
- फेफड़ों से होने वाले विसर्जन अच्छे तरीके से होने लगते हैं फल स्वरुप रक्त शुद्धि के साथ ही शरीर में कांति और ओज में वृद्धि होती है
- जांघों, कमर, पिंडलियों और पैरों के दर्द में आराम मिलता है कमर से पैरों तक जाने वाली साइटिका नाड़ी स्वस्थ होकर लंगड़ी रोग को दूर करता है
- पाचन और विसर्जन क्रियाओं को ठीक करता है गैस बनना भी रोकता है
Thursday, December 21, 2017
पर्यंकासन को करने की विधि और लाभ
पर्यंकासन
पर्यंकासन और सुप्तवज्रासन में कोई विशेष अंतर नही होता है कुछ लोग सुप्तवज्रासन को ही पर्यंकासन कहते हैं फिर भी विशेषज्ञ इन दोनों आसन में मामूली सा अंतर बताते हैं जिनके नितंब और कमर में चर्बी ज्यादा होती है वह यह आसन काफी सहूलियत से कर सकते हैं
पर्यंकासन को करने की विधि
इस आसन में एड़ी और पंजे नितंबों के नीचे दबाकर लेटना नहीं पड़ता है बल्कि लेटते समय दोनों पंजे और एड़िया जाँघों के दाएं-बाएं सटी हुई रख सकते हैं इस मामूली से अंतर से लाभ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता मतलब सुप्तवज्रासन के सारे लाभ पर्यंकासन में मिलते हैं
पर्यंकासन के लाभ
पर्यंकासन और सुप्तवज्रासन में कोई विशेष अंतर नही होता है कुछ लोग सुप्तवज्रासन को ही पर्यंकासन कहते हैं फिर भी विशेषज्ञ इन दोनों आसन में मामूली सा अंतर बताते हैं जिनके नितंब और कमर में चर्बी ज्यादा होती है वह यह आसन काफी सहूलियत से कर सकते हैं
पर्यंकासन को करने की विधि
इस आसन में एड़ी और पंजे नितंबों के नीचे दबाकर लेटना नहीं पड़ता है बल्कि लेटते समय दोनों पंजे और एड़िया जाँघों के दाएं-बाएं सटी हुई रख सकते हैं इस मामूली से अंतर से लाभ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता मतलब सुप्तवज्रासन के सारे लाभ पर्यंकासन में मिलते हैं
पर्यंकासन के लाभ
मेरुदण्ड, पीठ की पेशियों, कमर, वस्ति प्रदेश, जाँघे और घुटनों आदि का अच्छा व्यायाम हो जाने से यह पुष्ट और स्वस्थ हो जाते हैं पेट की आंतों में जमा हुआ मल और पेट पर अत्यधिक तनाव पड़ने से टूट टूट कर टुकड़ों में बंट जाते हैं जो गर्म पानी, नींबू और नमक का घोल पीने से मल के साथ बाहर निकल जाता है इसलिए सुप्तवज्रासन पुराने कब्ज को आंतों से निकलने और पाचन शक्ति को बढ़ाने का यह एक सर्वोत्तम आसन है इस आसन से बालों में कालापन और चेहरे पर चमक बढ़ती है
Wednesday, December 20, 2017
पादादिरासन के समय ध्यान रखने वाली खास बातें और उसके लाभ
पादादिरासन
वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों की मुठियां बांधकर बायीं मुट्ठी दाहिने बांह के जोड़ के नीचे और दाहिनी मुट्ठी बायें बांह के जोड़ के नीचे रखकर बाहों से छाती पर दबाव बनाया जाता है जिससे फेफड़ों पर कुछ इस प्रकार का दबाव बनता है कि दोनों फेफड़ों के पूरी तरह सक्रिय होने से दोनों स्वर चलने लगते हैं इस स्थिति को सुषुम्ना स्वर कहते हैं प्राणायाम की क्रियाओं से पहले पादादिरासन का अभ्यास बहुत जरूरी है
पादादिरासन के समय ध्यान रखने वाली खास बातें और उसके लाभ
आपकी नाक के नथुने दो 2 घंटे की अवधि के लिए बारी-बारी से काम करते हैं दाहिनी नाक के छेद से जब सांस आसानी से आ जा रही हो तो इसे इड़ा या सूर्य स्वर कहते हैं ठोस भोजन को आसानी से पचा लेने वाला एवं श्रेष्ठ कार्य प्रारंभ करने का शुभ मुहूर्त यही सूर्य स्वर है
जब बायें नाक के छिद्र से सांस आसानी से आ जा रही हो तब इसे पिंगला या चंद्र स्वर कहा जाता है इसे ठंडा स्वर माना जाता है इसके चलते समय यदि आप कोई तरल पेय पीते हैं तो वह लाभकारी होता है जब एक स्वर अपनी अवधि का क्रम पूरा कर लेता है तो वह धीमा पड़ने लगते हैं तब दूसरा स्वर कार्यभार संभालने के लिए तत्पर हो जाता है इस प्रकार इन दोनों स्वरों का संधि काल ही धार्मिक लोगों के शाम की पूजा का सही समय माना जाता है रीढ़ के गुरियों के बीच से गुजरने वाले नाड़ी गुच्छ में इन स्वरों की संचालिका तीन नाड़ियाँ हैं जिन्हें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी कहते हैं पादादिरासन में पूरी तरह योग्य व्यक्ति किसी भी समय मनचाही नाड़ी को सक्रिय कर मनचाहा स्वर चला या बदल सकता है यह शिथिलीकरण का सर्वश्रेष्ठ आसन है
राह चलते चलते भी इच्छित स्वर बदल कर इच्छित स्वास्थ्य लाभ की यह एक बहुत ही बेहतर विधि है क्योंकि स्वर विज्ञान भी अनेक रोगों को दूर करने की एक विशेष पद्धति है मृत्यु का एक एक पल पहले से ही जान लेना अद्भुत योग विद्या है
वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों की मुठियां बांधकर बायीं मुट्ठी दाहिने बांह के जोड़ के नीचे और दाहिनी मुट्ठी बायें बांह के जोड़ के नीचे रखकर बाहों से छाती पर दबाव बनाया जाता है जिससे फेफड़ों पर कुछ इस प्रकार का दबाव बनता है कि दोनों फेफड़ों के पूरी तरह सक्रिय होने से दोनों स्वर चलने लगते हैं इस स्थिति को सुषुम्ना स्वर कहते हैं प्राणायाम की क्रियाओं से पहले पादादिरासन का अभ्यास बहुत जरूरी है
पादादिरासन के समय ध्यान रखने वाली खास बातें और उसके लाभ
आपकी नाक के नथुने दो 2 घंटे की अवधि के लिए बारी-बारी से काम करते हैं दाहिनी नाक के छेद से जब सांस आसानी से आ जा रही हो तो इसे इड़ा या सूर्य स्वर कहते हैं ठोस भोजन को आसानी से पचा लेने वाला एवं श्रेष्ठ कार्य प्रारंभ करने का शुभ मुहूर्त यही सूर्य स्वर है
जब बायें नाक के छिद्र से सांस आसानी से आ जा रही हो तब इसे पिंगला या चंद्र स्वर कहा जाता है इसे ठंडा स्वर माना जाता है इसके चलते समय यदि आप कोई तरल पेय पीते हैं तो वह लाभकारी होता है जब एक स्वर अपनी अवधि का क्रम पूरा कर लेता है तो वह धीमा पड़ने लगते हैं तब दूसरा स्वर कार्यभार संभालने के लिए तत्पर हो जाता है इस प्रकार इन दोनों स्वरों का संधि काल ही धार्मिक लोगों के शाम की पूजा का सही समय माना जाता है रीढ़ के गुरियों के बीच से गुजरने वाले नाड़ी गुच्छ में इन स्वरों की संचालिका तीन नाड़ियाँ हैं जिन्हें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी कहते हैं पादादिरासन में पूरी तरह योग्य व्यक्ति किसी भी समय मनचाही नाड़ी को सक्रिय कर मनचाहा स्वर चला या बदल सकता है यह शिथिलीकरण का सर्वश्रेष्ठ आसन है
राह चलते चलते भी इच्छित स्वर बदल कर इच्छित स्वास्थ्य लाभ की यह एक बहुत ही बेहतर विधि है क्योंकि स्वर विज्ञान भी अनेक रोगों को दूर करने की एक विशेष पद्धति है मृत्यु का एक एक पल पहले से ही जान लेना अद्भुत योग विद्या है
सुप्त वज्रासन के लाभ
सुप्त वज्रासन
वज्रासन की स्थिति में बैठकर हाथों की एक कोहनी का सहारा लेते हुए शरीर को पीछे की ओर झुकाएं और दूसरी कोहनी का सहारा लेते हुए शरीर का संतुलन बनाए रखें फिर धीरे धीरे पीठ और सर भूमि पर लगाकर हाथ जांघों पर रखें या सिर की ओर से बढ़ाते हुए जमीन पर रखें या फिर सिर का ऊपरी भाग यानी गर्दन पीछे मोड़ते हुए जमीन से लगा ले इस आसन में जितनी देर रुक सकते हैं रुके फिर धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए वापस वज्रासन की स्थिति में आ जाएं
सुप्त वज्रासन के लाभ
मेरुदण्ड, पीठ की पेशियों, कमर, वस्ति प्रदेश, जाँघे और घुटनों आदि का अच्छा व्यायाम हो जाने से यह पुष्ट और स्वस्थ हो जाते हैं पेट की आंतों में जमा हुआ मल और पेट पर अत्यधिक तनाव पड़ने से टूट टूट कर टुकड़ों में बंट जाते हैं जो गर्म पानी, नींबू और नमक का घोल पीने से मल के साथ बाहर निकल जाता है इसलिए सुप्तवज्रासन पुराने कब्ज को आंतों से निकलने और पाचन शक्ति को बढ़ाने का यह एक सर्वोत्तम आसन है इस आसन से बालों में कालापन और चेहरे पर चमक बढ़ती है
वज्रासन की स्थिति में बैठकर हाथों की एक कोहनी का सहारा लेते हुए शरीर को पीछे की ओर झुकाएं और दूसरी कोहनी का सहारा लेते हुए शरीर का संतुलन बनाए रखें फिर धीरे धीरे पीठ और सर भूमि पर लगाकर हाथ जांघों पर रखें या सिर की ओर से बढ़ाते हुए जमीन पर रखें या फिर सिर का ऊपरी भाग यानी गर्दन पीछे मोड़ते हुए जमीन से लगा ले इस आसन में जितनी देर रुक सकते हैं रुके फिर धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए वापस वज्रासन की स्थिति में आ जाएं
सुप्त वज्रासन के लाभ
मेरुदण्ड, पीठ की पेशियों, कमर, वस्ति प्रदेश, जाँघे और घुटनों आदि का अच्छा व्यायाम हो जाने से यह पुष्ट और स्वस्थ हो जाते हैं पेट की आंतों में जमा हुआ मल और पेट पर अत्यधिक तनाव पड़ने से टूट टूट कर टुकड़ों में बंट जाते हैं जो गर्म पानी, नींबू और नमक का घोल पीने से मल के साथ बाहर निकल जाता है इसलिए सुप्तवज्रासन पुराने कब्ज को आंतों से निकलने और पाचन शक्ति को बढ़ाने का यह एक सर्वोत्तम आसन है इस आसन से बालों में कालापन और चेहरे पर चमक बढ़ती है
शशांकासन के फायदे
शशांकासन के लाभ
कब्ज की समस्या इस आसन के जरिये ख़त्म होती है आँतों का मल धकेलने की शक्ति तथा पाचन शक्ति बढ़ाने में लाभदायक है
जिन स्त्रियों का गर्भाशय छोटा होने से गर्भ में पल रहे शिशु का पूरी तरह विकास नहीं हो पाता है उनके गर्भाशय में विकास और गर्भधारण की शक्ति का भी विकास होता है जिन महिलाओं को बार बार गर्भ पात होता है उनके लिए तो यह आसन बहुत ही लाभदायक है
शशांकासन करने की विधि
वज्रासन की स्थिति में बैठकर सांस भरते हुए दोनों हाथ कानों को ढंकते हुए ऊपर उठाकर तानिये अब सांस बहुत धीरे धीरे छोड़ते हुए हाथों से सिर को चिपकाए रखते हुए ही सामने की ओर इतने झुकिए कि सर और हाथ जमीन पर छूने लगे इस स्थिति में आकर शरीर को ढ़ीला छोड़कर जितनी देर तक आप रुक सकते हैं इसी स्थिति में आराम करें और सांस सामान्य तरीके से लेते रहें उसके बाद धीरे धीरे वापस वज्रासन की स्थिति में आ जाएं इस आसन की स्थिति में आपका शरीर खरगोश जैसा दिखता है इसलिए इस आसन को शशांकासन कहते हैं
नोट
सुप्त वज्रासन के बाद शशांक आसन करने से जो लाभ मिलता है वह आश्चर्य जनक होता है
शिशुआसन के फायदे
शिशु आसन
शशांकासन से इस आसन में जरा सा अंतर होता है इस आसान को करने के लिए हाथ आगे की ओर नहीं फैलाएं जाते बल्कि मुठियां बांधकर नाभि के सामने खड़ी हुई जमा कर और आगे झुक कर माथा पृथ्वी पर टिकाया जाता है दोनों मुठियां जाँघ और पेट के बीच में पड़कर बड़ी आंत तथा मलाशय पर भारी दबाव बनाती हैं जिससे मलाशय का शुद्धिकरण अच्छी तरह होता है और मलाशय की विसर्जन क्रिया में सुधार होता है इस स्थिति में आपने शिशुओं को विश्राम करते हुए अवश्य देखा होगा छोटे बच्चों के शारीरिक विकास की गति में तेजी इसी कारण आती है और इस आसन में शरीर को पूरी तरह आराम मिलने के कारण ही इस आसन को शिशु आसन कहते हैं।
शिशुआसन के फायदे
शरीर मे स्फूर्ति आती है इस आसन के द्वारा माइग्रेन जैसी समस्या से भी आसानी से छुटकारा मिल जाता है शिशुआसन में वज्रासन के सारे लाभ मिलते है
शशांकासन से इस आसन में जरा सा अंतर होता है इस आसान को करने के लिए हाथ आगे की ओर नहीं फैलाएं जाते बल्कि मुठियां बांधकर नाभि के सामने खड़ी हुई जमा कर और आगे झुक कर माथा पृथ्वी पर टिकाया जाता है दोनों मुठियां जाँघ और पेट के बीच में पड़कर बड़ी आंत तथा मलाशय पर भारी दबाव बनाती हैं जिससे मलाशय का शुद्धिकरण अच्छी तरह होता है और मलाशय की विसर्जन क्रिया में सुधार होता है इस स्थिति में आपने शिशुओं को विश्राम करते हुए अवश्य देखा होगा छोटे बच्चों के शारीरिक विकास की गति में तेजी इसी कारण आती है और इस आसन में शरीर को पूरी तरह आराम मिलने के कारण ही इस आसन को शिशु आसन कहते हैं।
शिशुआसन के फायदे
शरीर मे स्फूर्ति आती है इस आसन के द्वारा माइग्रेन जैसी समस्या से भी आसानी से छुटकारा मिल जाता है शिशुआसन में वज्रासन के सारे लाभ मिलते है
Friday, December 8, 2017
धनुरासन और इसके फायदे
धनुरासन के लाभ
धनुरासन से हानि
जिन पुरुषों का प्रॉस्टेट ग्लैंड बढ़ा हुआ हो, हाई ब्लड प्रेसर मरीज,हृदय रोगी, जिनकी आंतों में अल्सर हो या जिन्हें हर्निया हो ऐसे लोगों के लिए यह आसन निषेध है ऐसे लोग यह आसन करेंगे तो शरीर को हानि पहुंच सकती है।
धनुरासन की खास विशेषता
शलभासन, हलासन, सर्पासन, मकरासन, नौकासन के लाभ इसी आसन से मिल जाते हैं।
धनुरासन
समतल भूमि पर कोई दरी बिछाकर पेट के बल लेट जायें पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए अपनी दोनों एड़ियों को दोनों नितंबों पर रखें अब अपने दोनों हाथ बढ़ाकर पंजों के नीचे टखनों को हाथों से अच्छी तरह पकड़ लें अब पेट में साँस भरते हुए हाथों से पकड़े हुए ही पैरों को ऊपर की ओर तानते हुए छाती, गला, मुख और दूसरी ओर से जाँघे और घुटने ऊपर की तरफ उठाते जाएं और शरीर द्वारा धनुष के आकार की स्थिति बनाए इस स्थिति में जब तक साँस रोक सकते हैं रोके रहे और शरीर को पूरा तनाव देते रहें फिर धीरे धीरे साँस छोड़ते हुए शरीर के उठे हुए भाग को नीचे लाएं पहले हथेलियों की पकड़ को छोड़े और पैरों को सीधा करें और थोड़ी देर के लिए रुके प्रतिदिन इस आसन को पांच छः बार अवश्य करें और सांस लेने व छोड़ने की स्थिति में निरंतर वृद्धि करते जायें।
दोलन धनुरासन
ऊपर दी गयी विधि के अनुसार पेट मे साँस भरे हुए धनुरासन में आने पर शरीर में नाभि को धुरी बनाकर शरीर को आगे पीछे लुढ़काये इस आसन से छाती, पेट के सभी अवयवों तथा जाँघों की मसाज होती है और इनमें मजबूती आती है।
सावधानी
यदि शरीर में चर्बी ज्यादा होने की वजह से या रीढ़ और जोड़ों के कड़ेपन की वजह से यदि इस आसन की स्थिति बनाने में तकलीफ हो रही है तो जबरदस्ती न करे रोज़ थोड़ा थोड़ा कोशिश करे शरीर मे से चर्बी कम होगी मांसपेशियों में लचक आएगी और रोज़ अभ्यास करने से एक समय के बाद आप इस आसन को पूरी तरह कर पाएंगे और आपका शरीर सुन्दर और स्वथ्य बनेगा।
By Sandeep Kumar Sunder
- पाचक रसों में वृद्धि कर पतले दस्त भूँख न लगना, भोजन सही से न पचना जैसी समस्याओं को दूर करता है।
- कड़े से कड़े और पुराने कब्ज को आँतों से बाहर निकालने योग्य स्थिति निर्मित करता है
- पेट के अंदर के सभी अंगों एवं श्वास संस्थानो की मालिश करता है
- पेट और कमर की चर्बी को कम कर सुन्दर और फुर्तीला बनाता है
- रीढ़ की हड्डी तथा हाथ पैरों की मांसपेशियों को स्वस्थ और पुष्ट बनाता है
- रक्त चाप, पाचन तंत्र व्यवस्थित होने से सुचारू गति से चलते हैं काम शक्तियों का नियमन कर स्वभाव में चंचलता और सरलता लाता है और यह असर एड्रिनल, थायराइड और थायमस ग्रंथियों के प्रभावित होने के कारण होता है।
- डायबिटीज मरीजों के लिए यह आसन बहुत ही सहायक है इस आसन को करने से अग्नाशय ग्रंथि स्वथ्य होती है जिससे इन्सुलिन का उत्पादन शरीर मे बढ़ता है जिससे यह आसन डायबिटीज रोगियों के लिए वरदान है।
धनुरासन से हानि
जिन पुरुषों का प्रॉस्टेट ग्लैंड बढ़ा हुआ हो, हाई ब्लड प्रेसर मरीज,हृदय रोगी, जिनकी आंतों में अल्सर हो या जिन्हें हर्निया हो ऐसे लोगों के लिए यह आसन निषेध है ऐसे लोग यह आसन करेंगे तो शरीर को हानि पहुंच सकती है।
धनुरासन की खास विशेषता
शलभासन, हलासन, सर्पासन, मकरासन, नौकासन के लाभ इसी आसन से मिल जाते हैं।
धनुरासन
समतल भूमि पर कोई दरी बिछाकर पेट के बल लेट जायें पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए अपनी दोनों एड़ियों को दोनों नितंबों पर रखें अब अपने दोनों हाथ बढ़ाकर पंजों के नीचे टखनों को हाथों से अच्छी तरह पकड़ लें अब पेट में साँस भरते हुए हाथों से पकड़े हुए ही पैरों को ऊपर की ओर तानते हुए छाती, गला, मुख और दूसरी ओर से जाँघे और घुटने ऊपर की तरफ उठाते जाएं और शरीर द्वारा धनुष के आकार की स्थिति बनाए इस स्थिति में जब तक साँस रोक सकते हैं रोके रहे और शरीर को पूरा तनाव देते रहें फिर धीरे धीरे साँस छोड़ते हुए शरीर के उठे हुए भाग को नीचे लाएं पहले हथेलियों की पकड़ को छोड़े और पैरों को सीधा करें और थोड़ी देर के लिए रुके प्रतिदिन इस आसन को पांच छः बार अवश्य करें और सांस लेने व छोड़ने की स्थिति में निरंतर वृद्धि करते जायें।
दोलन धनुरासन
ऊपर दी गयी विधि के अनुसार पेट मे साँस भरे हुए धनुरासन में आने पर शरीर में नाभि को धुरी बनाकर शरीर को आगे पीछे लुढ़काये इस आसन से छाती, पेट के सभी अवयवों तथा जाँघों की मसाज होती है और इनमें मजबूती आती है।
सावधानी
यदि शरीर में चर्बी ज्यादा होने की वजह से या रीढ़ और जोड़ों के कड़ेपन की वजह से यदि इस आसन की स्थिति बनाने में तकलीफ हो रही है तो जबरदस्ती न करे रोज़ थोड़ा थोड़ा कोशिश करे शरीर मे से चर्बी कम होगी मांसपेशियों में लचक आएगी और रोज़ अभ्यास करने से एक समय के बाद आप इस आसन को पूरी तरह कर पाएंगे और आपका शरीर सुन्दर और स्वथ्य बनेगा।
By Sandeep Kumar Sunder
Thursday, November 2, 2017
Future knocking you and ask secure your breath now..
Nowadays Delhi is the most popular city in India for pollution. but you don't need to laugh at them because your city going to becomes same as Delhi one day. All they are suffering from this problem due to not bother for the clean environment. We regularly use the vehicle for transport. We never think how we can avoid using the vehicle on roads. We always using own vehicle for our little relaxation, we never want to use public transport.
By Google
Nowadays human becomes little lazy if he gets an opportunity to complete any work by mobile or computer than he always tries to catch. He never wants to use their efforts. That is a big reason today's human never think about future. We never think about what life we will give to our upcoming generation.
By Google
We cut a tree and forest for our residential and commercial purpose. Making a big building in Metro City. It will create an effect to us. Nature always returns everything that we do with it. But some innocent people who are not an accused but they have to suffer as same like an accused. No one can avoid himself by a natural disaster. We are making disbalance with Nature that's why every year lot of innocent people bothered by Natural Disaster.
By Google
We know everything but always used firecracker in Diwali. And from next day we all are suffering from air pollution till the end of the months.We know there are a lot of vehicle on the roads but we add one more with them and fill the remain empty road. Lots of people throw garbage on roads.Lots of people pee, spit on roads and walls, all these are effective to our environment. We waste lots of drinking water from the tap. We are never planning to secure rainy water. There are few city where many factories running which throw polluted water, air, and garbage daily. We never think how we can rectify this mistake. We always waiting for a government to do something. If something happens wrong in the city then we blame to our government.
By Google
If we will not change our lifestyle then upcoming generation will suffer by the result. Maybe in Future India's every city carry a mask and buy oxygen cylinder for their breath when they come out from their home and for empty stomach they take medicine. Because everybody is moving to technology no one wants to do farming. And they may suffer for drinking water because we are wasting a lot of water every day.
We should change our thought now and try to co-operate each other to make clean and pollution free environment. Because we just imagine our Future as per our current activity but we all have a lot of time to think and change our lifestyle and habits and make our environment better. So that we can save our future and next generation future. Let's educate everyone and secure our World.
By Google
Nowadays human becomes little lazy if he gets an opportunity to complete any work by mobile or computer than he always tries to catch. He never wants to use their efforts. That is a big reason today's human never think about future. We never think about what life we will give to our upcoming generation.
By Google
We cut a tree and forest for our residential and commercial purpose. Making a big building in Metro City. It will create an effect to us. Nature always returns everything that we do with it. But some innocent people who are not an accused but they have to suffer as same like an accused. No one can avoid himself by a natural disaster. We are making disbalance with Nature that's why every year lot of innocent people bothered by Natural Disaster.
By Google
We know everything but always used firecracker in Diwali. And from next day we all are suffering from air pollution till the end of the months.We know there are a lot of vehicle on the roads but we add one more with them and fill the remain empty road. Lots of people throw garbage on roads.Lots of people pee, spit on roads and walls, all these are effective to our environment. We waste lots of drinking water from the tap. We are never planning to secure rainy water. There are few city where many factories running which throw polluted water, air, and garbage daily. We never think how we can rectify this mistake. We always waiting for a government to do something. If something happens wrong in the city then we blame to our government.
By Google
If we will not change our lifestyle then upcoming generation will suffer by the result. Maybe in Future India's every city carry a mask and buy oxygen cylinder for their breath when they come out from their home and for empty stomach they take medicine. Because everybody is moving to technology no one wants to do farming. And they may suffer for drinking water because we are wasting a lot of water every day.
We should change our thought now and try to co-operate each other to make clean and pollution free environment. Because we just imagine our Future as per our current activity but we all have a lot of time to think and change our lifestyle and habits and make our environment better. So that we can save our future and next generation future. Let's educate everyone and secure our World.
By
Sandeep Kumar Sunder
Subscribe to:
Posts (Atom)





